सपनो का घर और परिवार - Dream home and family

दूसरी महिलाओ की तरह राधा के भी सपने थे की उसका अपना घर हो, सपनो का घर , क्योकि इस बढ़ती महगाई में किराये के घर में रहना उसे खल रहा था. चार पांच साल महानगर में किराये पर रहने के बाद राधा के पति ने अपने भाइयो की साझेदारी से घर बनाने के लिए जमीन खरीद लिया. जिससे राधा के अपने घर का सपना सच होता दिखाई देने लगा. इसके साथ ही राधा को खुश होने का एक और मौका मिला जब उसे पता चला की उनके घर नया मेहमान आने वाला हैं. इस नए मेहमान के लिए राधा बहुत ही उत्साहित थी. यह नया मेहमान उनके जेठानी के घर आने वाला था जिसके लिए राधा उत्साहित थी. समय बीतता गया एक तरफ राधा का घर बन कर तैयार हुआ तो दूसरी तरफ नए मेहमान के घर आने का समय भी नजदीक आ रहा था.

घर के पूरा होते ही राधा ख़ुशी ख़ुशी वह पूजा- हवन करने के बाद रहने लगी. राधा का सपना सच हो गया. राधा के घर में आने के बाद नए मेहमान के लिए उत्साह और भी बढ़ गया . समय के साथ साथ राधा अपने घर को सजाने सवारने में व्यस्त हो गई इस बिच खबर आई कि नए मेहमान का आगमन हो गया हैं उसके घर लक्ष्मि आई हैं. राधा सुन कर फूली नही समाई. राधा ने सोचा अगले दिन ही मिलने जाउंगी. ;लेकिन अगले दिन उनके पति को छुट्टी नही मिली. उनके पति एक प्राइवेट कंपनी में मेनेजर थे. उस दिन उन्होंने ने सोच कोई बात नही आज नही तो रविवार को चले जायेंगे. हालाँकि बेटी अभी ईसीयू में थी. लेकिन पति कि नौकरी और अपने घर कि चिंता और बच्चे कि पढाई से राधा को समय नही मिलता था. कुछ दिन बाद जब लड़की ठीक होकर अपने माँ-पापा के पाश घर आई गई तब भी राधा का मन हुआ की जाकर एक बार देख लेते, लेकिन अगले ही पल उससे ख्याल आया की एक दो दिन में दुर्गाष्टमी हैं. उस दिन तो मुझे माँ दुर्गा की पूजा करने हैं. कंचक खिलाना हैं. ऐसे में अगले दिन चली जाउंगी. ऐसे ही समय बीतता गया राधा मन में बेटी को देखने की इच्क्षा लिए हुए अपने सपनो के घर में दुर्गाष्टमी की पूजा और घर का देखा भाल करती रही लेकिन मौत के मुह से बहार आई बेटी को देखने का योग नही बन रहा था. ऐसा नही हैं की राधा उससे मिलना नही चाहती थी शायद उसके सपनो के घर के आगे उसको परिवार नजर  नही आ रहा था.


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