भविष्य की आशाएँ युवा - National Youth Day



12 जनवरी को हमारा भारत वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में 1985 से मनाता आ रहा हैं. युवाओ के इस देश में विकास की तेज रफ़्तार के साथ कदम से कदम मिला कर चलना किसी चुनौती से कम नही हैं. लेकिन युवा वर्ग तेजी से हो रहे परिवर्तन को समझ सकने में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में पीछे नही हैं. नई तकनिकी हो या नई खोज हर एक की जानकारी को हासिल  करने के साथ ही इसे अपने कार्यशैली में सामिल करने में भी सक्षम हैं. जो उन्हें विश्व स्तर पर अपने आप को स्थापित करने और बनाये रखने में मदद करती हैं.  देखा जाय तो लगभग एक अरब 28 करोड़ जनसँख्या में 28 फीसदी युवा हैं जो 2020 तक 15 - 35 साल के युवाओ की आबादी 45 करोड़ 80 लाख यानी पूरी आबादी का 63 फीसदी हो जाएगी. ऐसे में विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपनी बड़ी युवा आबादी के साथ नई ऊंचाई पर जा सकती हैं, यदि वे युवा लोगों की शिक्षा व स्वास्थ्य में भारी निवेश करें और उनके अधिकारों का संरक्षण करें. 



दुनिया के सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश में बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है जो देश के लिए खतरे की घंटी से कम नही हैं. इस समय की बात की जाय तो देश में हर 3 स्नातकों में एक व्यक्ति बेरोजगार है. हमारे देश में बेरोजगारी की दर 9 प्रतिशत से भी ज्यादा हैं. लेकिन मुद्दे की बात यह है कि युवा देश के विशेष अंग हैं जिनका देश को आगे बढ़ाने में बहुत ही महत्यपूर्ण योगदान होता है. और इसी खास वजह से स्वामी विवेकानंद ने अपने आदर्शों और विचारों को स्थापित करने के लिए सबसे पहले युवाओं को चुना. स्वामी विवेकानंद के अध्यापन, विचार और दर्शन भारत की महान सांस्कृतिक और पारंपरिक संपत्ति हैं. आपको बता दे कि देश की ऐतिहासिक परंपरा को बनाने और नेतृत्व करने के लिये युवा शक्ति पर विश्वास करने वाले स्वामी विवेकानंद का जन्म वर्ष 1863 में 12 जनवरी को हुआ था. जिनका मानना था कि विकसित होने के लिये देश के द्वारा कुछ उन्नति की जरुरत है. और उन्ही  कि प्रेणना से भारत के सम्माननीय युवाओं को उत्प्रेरित करने और बढ़ावा देने के लिये हर वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की शुरुआत1985 से हुई.

 

आज की युवा स्वामी विवेकानंद की आदर्शों और विचारों से परे हैं. स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि " मेरी भविष्य की आशाएँ युवाओं के चरित्र, बुद्धिमत्ता, दूसरों की सेवा के लिए सभी का त्याग और आज्ञाकारिता– खुद को और बड़े पैमाने पर देश के लिए अच्छा करने वालों पर निर्भर है." लेकिन आज के युवाओ में चरित्रहीनता, स्वार्थीपन और ऐयाशी के अलावा कुछ नही हैं. इसका उदाहरण आये दिन समाचार पत्रो और चैनलो पर पढ़ा और सुना जा सकता हैं. यदि कोई भी युवा यदि युवा दिवस को मनाता हैं. तो उसको पहले इसकी सार्थकता को समझ लेनी चाहिए. यदि आज कल के सबसे ज्वलन विषय की बात करे तो यह हैं महिलाओ की सुरक्षा. जो इस देश इस समाज के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबस है. यदि आंकड़े की बात करे तो 2013 से लेकर 2016 के बिच महिलाओ से जुडी लगभग 9 लाख घटनाये हुए हैं जिसके अनुसार हर एक मिनट में देश की 27 महिलाओ को किसी ना किसी घटना का शिकार होना पड़ा हैं. इसका जिम्मेदार कौन हैं ? इसका जबाब किसी के पास नही हैं. और मैं किसी से जबाब चाहिए भी नही. इसका जिक्र करने के पीछे मेरी सोच यह हैं की यदि इस युवाओ के देश में यदि स्वामी जी द्वारा कहि गई एक बात पर भी कोई युवा अमल करने लग जाय तो इस तरह की घटनाये अपने आप कम हो जाएँगी. इतना ही नही युवा दिवस की सार्थकता के साथ स्वामी जी का विश्वास भी बना रहेगा. लेकिन इस बात को मानेगा कौन ? देखने वाली बात यह हैं की कितने युवा एक महान इंसान स्वामी जी के आदर्शो के अपनाने का संकल्प लेते हैं. 


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