मुझे सलमान की फिल्म दबंग का करैक्टर पांडेय जी के रोल में विनोद खन्ना साहब का अभिनय मन में चल रहा हैं. कैसे चुलबुल पण्डे उनको परेशान करते हैं. चांदनी रत में छत पर उनका कहानी सुनना. चुलबुल के मुँह से पांडेय जी सुनकर चिढ़ना. फिल्म वांटेड में एक साहसिक पिता के रोल में गनी भाई (प्रकाश राज) को हड़काना. मतलब उनका 70 से लेकर 90 के दशक की फिल्मो के एक एक किरदार सराहनीय हैं. विलेन के रूप ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले विनोद जी ने करीब करीब 150 फिल्मे की हैं. 7 अक्टूबर, 1946 में पेशावर में जन्मे विनोद जी पंजाब के गुरुदास पुर से चार बार सांसद रहे. आपको बता दे की 70 और 80 के दशक में सुपरस्टार विनोद जी मेगास्टार अमिताभ बच्चन के प्रतिद्वंदी हुआ करते थे. अमिताभ जी के साथ उन्होंने 'मुकद्दर का सिकंदर', 'परवरिश', 'अमर अखबर एंथॉनी' में काम किया था. वही 'मेरे अपने', 'कुर्बानी', 'पूरब और पश्चिम', 'रेशमा और शेरा', 'हाथ की सफाई', 'हेरा फेरी', 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी कई शानदार फिल्मो के लिए विनोद खन्ना हमेशा याद किये जायेंगे. 1987 से 1994 में उनके लिए बॉलीवुड में एक ऐसा समय भी था जब वह बॉलीवुड के सबसे महंगे कलाकार हुआ करते थे. बॉलीवुड में अपना सिक्का जमाने के दौरान ही उन्होंने 1975 में ओशो का अनुसरण किया. और लगातार उनके आश्रम में जाकर उनसे मिलते रहे. कुछ समय बाद फिल्म इंडस्ट्रीज को छोड़ अमेरिका चले गए वहा 5 साल उन्होंने ओशो की शरण में बिताया. 1998 में राजनीति में कदम रखने वाले विनोद खन्ना कभी चुनाव नहीं हारे. हिंदी फिल्मो के जैसा राजनीती में भी उनका करियर ग्राफ अच्छा रहा. सांसद चुना जाने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 2002 - 2003 में पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री और 2003 -2004 में विदेश राज्यमंत्री रहे. वही मौजूदा सरकार में कृषि मंत्रालय की परामर्श कमेटी के सदस्य थे.
फिल्म हाथ की सफाई के लिए 1974 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और नेशनल यूथ फिल्म अवार्ड से सम्मानित हुए. फिल्म और राजनीती के अलावा संगीत, फोटोग्राफी और ड्राइविंग का शौक तो था ही क्रिकेट, बैडमिंटन खेलने के साथ साथ अपने कॉलेज के समय में जिमनास्ट और बॉक्सर थे. ऐसे प्रतिभावान विनोद खन्ना हमेशा के लिए अमर हो गए.
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