फिल्म पद्मावती का विरोध होने का मूल कारण क्या है - Protest against Film Padmavti

यह पहली बार नहीं है कि किसी फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. लेकिन विरोध होने का मूल कारण क्या है ? यदि रानी पद्मावती के इतिहास का कोई प्रमाण है तो वह हैं मालिक मुहम्मद जायसी की काव्य रचना 'पद्मावत'. जायसी ने 1540 से इसकी रचना की थी. जिसमे पद्मावती के बारे में व्याख्या किया गया है. पद्मावत का मतलब है अति सुन्दर स्त्री. रानी पद्मावती खूबसूरत होने के साथ वीरांगना भी थी जिनके वीरता, त्याग और छल का व्याख्यान भी किया गया है. रावत रतन सिंह चितौड़गढ़ के राजपूत शासक थे जिन्होंने पद्मावती को उनके स्वयवर से विवाह करके लाये थे. खिलजी  दिल्ली का राजा था जिसे पद्मावती के बारे में रतन सिंह के राज्य से निकले गए गायक ने बताया. फिर खिलजी ने चितौड़गढ़ पर चढ़ाई कर दी लेकिन सफल नहीं हुआ तो कूटनीति चल चलते हुए राजा रतन सिंह को बंदी बना लिया. इसके बदले में रानी पद्मावती को माँगा. फिर रानी और उनके चतुर सेनापतियों ने उसके साथ छल किया. जिससे राजा आजाद  हुए और किले में चले गए लेकिन घमाशान युद्ध हुआ, उसी समय चितौड़गढ़ की हार भांपते हुए रानी पद्मावती ने पत्नीधर्म निभाया. अपने पतिव्रता होने का प्रमाण देते हुए 1600 स्त्रियों के साथ अग्नि समाधि ले ली. जिसे जौहर कहते है.



इसके अलावा इतिहासकरो के अनुसार पद्मावती की कहानी काल्पनिक भी हो सकती है. वही संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती बन कर तैयार है लेकिन भंसाली खुद इस बात को लेकर असमंजस में है कि उनकी फिल्म इतिहास से प्रेरित है या फिर काल्पनिक है. सिनेमा और इतिहास में एक बात समान्य है कि दोनों समाज को आइना दिखने का कार्य करती हैं. लेकिन इतिहास बिता हुआ कल हैं जिसे दोहराया नहीं जा सकता है वही एक मुद्दे पर हजार फिल्मे बनती हैं. जिसे दोहराया नहीं जा सकता, जिसमे हमारे पूर्वजो व्याख्यान मिलता है उस पर भी फिल्मे बनाई जा रही हैं. जो सौ फीसदी अक्षरसः इतिहास को नहीं दर्शाती हैं. ऐसे में छोटी छोटी बाते छूट जाती है. जिसके बाद इतिहास को मरोड़ने का शिलशिला शुरू हो जाता है.जिसे देख-सुन कर कान और आँख बेचैन हो जाता है. कि हमने क्या पढ़ा था अपने पूर्वजो के बारे में और यह क्या देखने और सुनने को मिल रहा है.



इससे बेहतर तो यह होगा कि इतिहास को छूने की ही इजाजत ना हो. यदि पद्मावती की ही बात करे तो उस समय के दौर में रानी किसी के सामने भी पर्दे में होती थी तो फिर रानी पद्मावती के लिए सबके साथ नाचना दूर की बात है. लेकिन जब इन पर फिल्म बनेगा तो जाहिर सी बात है दर्शको के मन को बहलाने के लिए फिल्म में गाने भी होंगे और अभिनेता अभिनेत्री डांस भी करेंगे. इन्हे जो करना है करे लेकिन पद्मावती जैसी ऐतिहासिक मुद्दे को मनोरंजन के लिए इस्तेमाल ना करे. यह आप समाज को क्या दिखन चाहते है की रानी नृत्य करती थी जो कभी किसी अनजान के सामने नहीं आई. रानी पद्मावती के जौहर के उल्लेख मिलता है इसिहास में लेकिन उनको नृत्य और संगीत का भी शौक था ऐसा किसी ने कही नहीं लिखा है. एक तो इतिहास से छेड़- छड़ उसपर से नारी की मर्याद का भी ख्याल नहीं है. क्या कभी किसी ने मुगलो के इतिहास के साथ ऐसा वर्ताव किया है. तो फिर हिन्दुओ के इतिहास के साथ ही ऐसा क्यों ?





आमतौर पर ऐसा देखने को मिलता रहा है कि फ़िल्मकार इतिहास से सिर्फ किरदार को चुनते है उसके तथ्यों को नहीं. और इतिहास के नाम पर मनगढ़ंत कहानियों पर फिल्म बनाते है. देखा जाय फिल्म देखने वाले दर्शक भी कुछ हद तक पढ़ना भूल चुके है उन्हें बस देखकर ही सबकुछ जानना है. जिसका सिनेमा जगत उठा रहा है. लेकिन अपवाद हर जगह है. इसलिए ऐसे मुद्दों पर लोग विरोध करते है जिसके बारे में पहले जानकारी रखते है. अब जब आप ऐसे मुद्दे उठेंगे तो आपको इसका परिणाम भुगतना ही पड़ेगा. विरोध झेलना ही पड़ेगा. लेकिन कई बार यह विरोध और विवाद फिम्ल की पब्लिसिटी के लिए भी होता है. राजस्थान में सूटिंग के दौरान भी इस फिल्म का विरोध हुआ था. जिसके बाद एक न्यूज़ चैनल ने इसकी तह तक जाने की कोशिश की तो पता चल की लोग इस तरह के हथकंडे पैसा कमाने के लिए करते और फिल्म इंडस्ट्रीज वाले पब्लिसिटी पाने के लिए. लेकिन फिल्म पद्मावती का विरोध जो लगभग पुरे भारत में हो रहा है यह कतई पब्लिसिटी स्टंट नहीं हो सकता. यह विरोध है अपने पूर्वजो के साख को बचाने की जिसके साथ किसी भी खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है.

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